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भारत को प्रोत्साहन आधारित "वन चाइल्ड पॉलिसी" लागू करनी होगी - डॉ. अंकित नाहटा

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हमारे देश भारत की तेजी से बढ़ती जनसंख्या पिछले कई दशकों से सरकार और समाज दोनों के लिए चिंता का प्रमुख विषय बनी हुई है। हाल ही में विश्व जनसंख्या के नवीनतम आकलनों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अब दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है।  यह उपलब्धि जितनी सांख्यिकीय रूप से बड़ी प्रतीत होती है, व्यवहारिक दृष्टि से उतनी ही गंभीर चुनौतियों को जन्म देती है। संसाधनों पर बढ़ता दबाव, स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में बढ़ती भीड़, रोजगार सृजन की कमी और शहरों का अनियंत्रित विस्तार ये सभी चुनौतियाँ हमें एक ऐसे समाधान की ओर सोचने के लिए मजबूर करती हैं, जो भारत की वास्तविकताओं के अनुरूप हो, क्योंकि अगर हम जनसंख्या नियंत्रण पर ध्यान नहीं देंगे तो आने वाला समय भारत के लिए बहुत ही विकट और भयावह हो सकता है ।  “प्रोत्साहन आधारित वन चाइल्ड पॉलिसी” अब एक शानदार तर्कसंगत और आवश्यक विकल्प बनकर उभर रही है। मेरा ऐसा मानना है कि भारत चीन जैसी जबरन थोपे जाने वाली वन चाइल्ड पॉलिसी भले ही लागू ना करें, लेकिन स्वैच्छिक और आकर्षक प्रोत्साहनों पर आधारित नीति की जरूरत है, जो नागरिकों को किसी भी तर...

बिना त्याग, तपस्या और अनुशासन के विपक्ष की वापसी मुश्किल - डॉ. अंकित नाहटा

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विपक्ष लोकतंत्र का पर्याय है, और जहां विपक्ष नहीं वहां लोकतंत्र नाम मात्र का होता है या ऐसे कहे की लोकतंत्र के नाम पे वो तानाशाही और राजतंत्र होता है । भारत जो 140 करोड़ से ज्यादा की आबादी वाला मुल्क है, यहां विपक्ष का ना होना मतलब लोकतंत्र और लोगों की आवाज की हत्या जैसा हो सकता है । आज जिस तरह से विपक्ष काम कर रहा है उससे यह साफ साफ नजर आता है की बीजेपी के सामने उनका टिकना और राजनीनिक लक्ष्य हासिल करना मुश्किल है ।  विपक्ष जहां आंतरिक लोकतंत्र ज्यादा है, जहां हर इंसान लगभग व्यक्तिगत सफलता के लिए ज्यादा कोशिश करता है, एक दूसरे को नीचे गिराना यह सोच कर की शायद इसके पतन के बाद ही मेरी तर्रकी संभव है, केंद्रीय नेतृत्व का जमीनी लेवल तक पकड़ बीजेपी के मुकाबले काफ़ी कमजोर है। बीजेपी जहां बगावत मतलब राजनीतिक मौत, वही विपक्ष जहां बगावत आम बात है क्योंकि कोई अनुशासन नही है, व्यक्तिगत स्वार्थ इस कदर हावी है की पार्टी दूसरे दर्जे पे रहती है और खुद का स्वार्थ और महत्वाकांक्षा प्रथम दर्जे पे रहती है । आज के समय की राजनिति में अगर आप माइक्रो लेवल पर प्रबंधन नहीं कर सकते है तो आप बीजे...

बीजेपी का उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को संदेश

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बीजेपी जो आज राजनीति का पर्याय बन चुकी है भारत में, अगर बीजेपी को कोई राजनीतिक रूप से हल्के में ले रहा है तो उसकी राजनीतिक असफलता निश्चित है, बीजेपी राजनीति नही करती है, वो जैसा चाहे वैसे राजनीति को अपने रंग रूप में ढाल रही है ।उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने शायद कभी नहीं सोचा होगा कि उन्हें अविश्वास प्रस्ताव से गुजरना पड़ेगा, धनखड़ ने आज से कुछ दिनों पहले किसानों को लेकर जिस तरह से बयान कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के समाने दिए, उससे शायद बीजेपी को काफी आलोचना झेलनी पड़ी । उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने किसान पुत्र होने के नाते किसान और किसान आंदोलन से जुड़े कुछ सवाल बड़े गंभीर रूप से उठाए, लेकिन धनखड़ जी को यह पता नही था की बीजेपी की आलोचना और किसानों का समर्थन उनकी राजनीतिक जमीन को खोखला कर सकता है, क्योंकि अभी समय नरेंद्र मोदी और अमित शाह का चल रहा है, आप अगर उनके साथ है तो आप सब कुछ है और अगर विपरीत है तो जो पाया है वो भी कभी भी, कैसे भी आपसे छीन सकता है । हाल ही में लाए गए उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव में कही ना कही यह साफ और स्पष्ट संदेश था बीजेपी क...

गलत दिशा और दशा से गुजरता भारत

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भारत जो कभी नाम ही काफी था दुनिया के लिए, मुगलों से लेकर अंग्रेजो ने जिसने जैसा चाहा वैसे भारत को बनाया, लूटा, कानून बनाए, अत्याचार किए ।साल 1947 में फिर से हमारा भारत हमारे पास आया, अब ऐसा लगा कि हम फिर से दुनिया को दिशा, दर्शन और आध्यात्म से बेहतर करने के लिए कौशिश करेंगे।दुनिया भर की लूट मार से उभरते उस वक्त के हमारे पूर्वजों ने इस भारत और हमारी बेहतरी के लिए जो प्रयास 200 सालों तक किए उसका परिणाम हमारे सामने था । हम खुली हवा में श्वास ले सकते थे, हम कानून को हमारी समझ, हमारे दर्शन, और हमारी शिक्षा से बना सकते थे ।साल 1947 से आज तक हमारे भारत ने तर्रकी की है,इस बात से कोई मना नहीं कर सकता है, लेकिन साथ में यह संशय भी है की क्या आज हम जहा खड़े है दुनिया में, क्या हम इससे बेहतर कर सकते थे पिछले 70 सालों में ? जवाब होगा हां ।हम जहा आज खड़े है उससे कही बेहतर हम कर सकते थे अगर हमें सही दिशा और दर्शन मिला होता तो ! लेकिन शर्म इस बात की है की आज भी हम उसी दिशा और दशा से होते हुए गुजर रहे है ।इस भारत में मेहनतकश लोगों की कोई कमी नहीं है, हम यह बात दावे के साथ कह सकते है की दुनिय...

चाइना का कोरोना खेल और सवाल उठाने के लिए मजबूर होते हम | Corona vs Immunity |

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साल 2020 की शुरुआत एक ऐसे वायरस से हुई है जिसने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है,दुनिया में कभी नहीं होने वाली चीजें होने लगी, बड़ी बड़ी देशों की अर्थव्यवस्था चपेट में आने लगी | प्रथम विश्व युद्ध और द्वितीय विश्व युद्ध के समय जिन चीजों को बंद नहीं किया गया था, इस कोरोना काल में  उन तमाम चीजों को बंद कर दिया गया  | व्यापार पर रोक लगा दी गई, आवाजाही पर रोक लगा दी गई,  घर से बाहर निकलने पर रोक लगा दी गयी | डर का माहौल ऐसा की कोई कदम उठाने और बोलने से पहले एक बार फिर सोचने और विचारने की जरूरत महसूस होने लगी | दूसरी तरफ पूरी दुनिया की नजर चीन पर है अमेरिका जैसे कई देश चाहते हैं कि चीन पर प्रतिबंध लगाया जाए, कई कंपनियां चीन छोड़कर बाकी देशों में अपना व्यापार करने पर विचार कर रही है, इन सब परिस्थितियों के बीच आज यह कहना कि चीन दुनिया में तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था है  यह कोई नई बात नहीं है, चीन ने इसकी तैयारी 80 के दशक से शुरू कर दी थी  | अमेरिका जैसे देशों का मानना है कि चीन ने जानबूझकर यह वायरस बनाया ताकि जैविक हथियार के रूप में इस...

मेरा आप सब लोगों से अनुरोध हैं कि इस किताब को एक बार पढ़े जरुर क्यूंकि यह सिर्फ मेरी किताब नही हैं | यह भारत के उन करोड़ों लोगों की आवाज़ है जो भारत को बदलना चाहते हैं |

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Speech on 26 January 2020 in Govt. School New Parasoli. | Ankit Nahata |

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