गलत दिशा और दशा से गुजरता भारत

भारत जो कभी नाम ही काफी था दुनिया के लिए, मुगलों से लेकर अंग्रेजो ने जिसने जैसा चाहा वैसे भारत को बनाया, लूटा, कानून बनाए, अत्याचार किए ।साल 1947 में फिर से हमारा भारत हमारे पास आया, अब ऐसा लगा कि हम फिर से दुनिया को दिशा, दर्शन और आध्यात्म से बेहतर करने के लिए कौशिश करेंगे।दुनिया भर की लूट मार से उभरते उस वक्त के हमारे पूर्वजों ने इस भारत और हमारी बेहतरी के लिए जो प्रयास 200 सालों तक किए उसका परिणाम हमारे सामने था । हम खुली हवा में श्वास ले सकते थे, हम कानून को हमारी समझ, हमारे दर्शन, और हमारी शिक्षा से बना सकते थे ।साल 1947 से आज तक हमारे भारत ने तर्रकी की है,इस बात से कोई मना नहीं कर सकता है, लेकिन साथ में यह संशय भी है की क्या आज हम जहा खड़े है दुनिया में, क्या हम इससे बेहतर कर सकते थे पिछले 70 सालों में ? जवाब होगा हां ।हम जहा आज खड़े है उससे कही बेहतर हम कर सकते थे अगर हमें सही दिशा और दर्शन मिला होता तो ! लेकिन शर्म इस बात की है की आज भी हम उसी दिशा और दशा से होते हुए गुजर रहे है ।इस भारत में मेहनतकश लोगों की कोई कमी नहीं है, हम यह बात दावे के साथ कह सकते है की दुनिया का सबसे मेहनती कोई नागरिक है तो वो भारतीय है जो आज भी बिना अपना हक जाने, बिना स्वार्थ देखे अपने जीवन से भारत को बेहतर करने के लिए दिन रात लगा हुआ है।साल 2014 के बाद इस भारत में नई आस लिए युवा और हर नागरिक इस उम्मीद में था की शायद अब हम हर क्षेत्र में हमारी गलतियों को सुधारेंगे और बेहतर भारत कि तरफ प्रगतिशील होंगे ।लेकिन इसके उलट जिस तरह पिछले 10 सालों में भारत में जहर और नफरत को बोने का काम किया गया उससे भारत पूरी तरह नफरत और मुद्दाविहीन गति की तरफ जाता हुआ दिख रहा है ।उम्मीद थी की शायद अब भ्रष्टाचार, शिक्षा, स्वास्थ, पानी, बेरोजगारी और किसानों के हालात जैसे मुद्दों को बेहतरी से समझ के उनको सुलझाया जायेगा, लेकिन आज सबसे ज्यादा बिगड़े हुए हालात इन्ही चीजों में दिख रहे है ।किसी देश की तर्रकि इस बात से आप  देख सकते है की वहां के नागरिक धर्म और जाति को किनारे करते हुए दुसरे मुद्दों को लेकर कितने उत्सुक है, लेकिन आज का भारतीय नागरिक दिशाविहीन, मुद्दाविहीन होते हुए भ्रमित होते हुवे दिख रहा है।देश में नेता जो इधर वाले हो या उधर वाले हो इस भारत को उस तरफ धकेल रहे है जहां से पुनः लौटना मुश्किल लगता है, उन्हें सिर्फ अपनी, अपनी पार्टी और अपने परिवार की परवाह है, उन्हें यह फर्क नहीं पड़ता है की इस देश के युवा, मेहनतकश किसान और मजदूर क्या चाहता है । हर पार्टी यह पुरी कौशिश करती है की मेहनतकश लोगों को राजनीतिक रूप से कभी धर्म तो कभी जाति जैसे मुद्दों को आगे लाके उनको पागल बना के उनकी मेहनत को लूटा जाय और इस काम के लिए उनको मार्गदर्शन इस देश की व्यापारियों से मिलता है, या यूं कहे की इस देश के कुछ चुनिंदा व्यापारी ही इस देश की सरकारों को अपने हिसाब से चला रहे है ।भारत जो किसानों मजदूरों, जमीन से जुड़े हुवे लोगों की मेहनत से चलता है आज सबसे ज्यादा हालात उनके खराब है, खराब होने की सबसे बड़ी वजह राजनीतिक अपरिपक्वता है, इस देश का युवा किसान और मजदूर यह समझ ही नही पा रहा है की हर राजनीतिक इंसान उन्हें पागल बना के पावर अपने हाथ में लेके उनके साथ ही लूट मार कर रहा है, और उनको राजनीतिक लॉलीपॉप कभी धर्म तो कभी जाति के नाम पे दी जा रही है ।इस देश में आज ऐसे नेता कि जरूरत है जो मूलभूत मुद्दों को समझें और उनकी बेहतरी के लिए काम करें ना की लोगों को आपस में लड़वा कर, लोगों की नफरत के सहारे और इस भारत को बर्बाद करके अपनी राजनीतिक पराकाष्ठा पूरी करें ।इस देश के युवा, किसानों और मजदूरों को अपने दिमाग को थोड़ा तेज करना चाहिए अपने विवेक से सोचना विचारना चाहिए और अपनी खुली आंखों से यह देखना चाहिए की कौन है जो उनको गलत दिशा में ले जा रहा है जहां सिर्फ नफ़रत और बर्बादी है ।

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