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बिना त्याग, तपस्या और अनुशासन के विपक्ष की वापसी मुश्किल - डॉ. अंकित नाहटा

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विपक्ष लोकतंत्र का पर्याय है, और जहां विपक्ष नहीं वहां लोकतंत्र नाम मात्र का होता है या ऐसे कहे की लोकतंत्र के नाम पे वो तानाशाही और राजतंत्र होता है । भारत जो 140 करोड़ से ज्यादा की आबादी वाला मुल्क है, यहां विपक्ष का ना होना मतलब लोकतंत्र और लोगों की आवाज की हत्या जैसा हो सकता है । आज जिस तरह से विपक्ष काम कर रहा है उससे यह साफ साफ नजर आता है की बीजेपी के सामने उनका टिकना और राजनीनिक लक्ष्य हासिल करना मुश्किल है ।  विपक्ष जहां आंतरिक लोकतंत्र ज्यादा है, जहां हर इंसान लगभग व्यक्तिगत सफलता के लिए ज्यादा कोशिश करता है, एक दूसरे को नीचे गिराना यह सोच कर की शायद इसके पतन के बाद ही मेरी तर्रकी संभव है, केंद्रीय नेतृत्व का जमीनी लेवल तक पकड़ बीजेपी के मुकाबले काफ़ी कमजोर है। बीजेपी जहां बगावत मतलब राजनीतिक मौत, वही विपक्ष जहां बगावत आम बात है क्योंकि कोई अनुशासन नही है, व्यक्तिगत स्वार्थ इस कदर हावी है की पार्टी दूसरे दर्जे पे रहती है और खुद का स्वार्थ और महत्वाकांक्षा प्रथम दर्जे पे रहती है । आज के समय की राजनिति में अगर आप माइक्रो लेवल पर प्रबंधन नहीं कर सकते है तो आप बीजे...