तीन तलाक - Triple Talaq
किसी महिला के साथ अन्याय, नहीं नहीं आप इसे ऐसे समझिए किसी इंसान के साथ अन्याय हो जाए तो ऐसी परिस्थिति में आप क्या करेंगे उसे न्याय देने की कोशिश करेंगे या न्याय दिलाने की बात करेंगे | ऐसा ही कुछ तीन तलाक है जहां एक पुरुष अपने आप को सब कुछ समझता है और सोचता है कि फैसला लेने का अधिकार सिर्फ उसे ही है | वो पहले शादी करता है या अगर मुस्लिम भाषा में कहें तो एक समझौता करता है और जब उसे लगता है कि अब मुझे समझौता रद्द कर देना चाहिए तो वह तीन बार तलाक शब्द बोलकर समझौता रद्द कर देता है उसके बाद उसका उस पत्नी के साथ कोई रिश्ता नहीं रहता है और वह अब नए समझौते की तलाश में होता है | ऐसा ही कुछ हमारे देश में एक महिला के साथ हुआ और उसने फैसला लिया कि इस समझौते ने उसका जीवन बिगाड़ दिया और अब वह चुप नहीं बैठ सकती और इसी के चलते उसने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की और फैसला इंसानियत और संवैधानिकता के आधार पर उस महिला के पक्ष में आया और तीन तलाक को इंसानियत से परे यानी असंवैधानिक बता दिया गया | टीवी पर डिबेट होने लगी धर्म के ठेके...