चाइना का कोरोना खेल और सवाल उठाने के लिए मजबूर होते हम | Corona vs Immunity |
साल 2020 की शुरुआत एक ऐसे वायरस से हुई है जिसने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है,दुनिया में कभी नहीं होने वाली चीजें होने लगी, बड़ी बड़ी देशों की अर्थव्यवस्था चपेट में आने लगी | प्रथम विश्व युद्ध और द्वितीय विश्व युद्ध के समय जिन चीजों को बंद नहीं किया गया था, इस कोरोना काल में उन तमाम चीजों को बंद कर दिया गया |
व्यापार पर रोक लगा दी गई, आवाजाही पर रोक लगा दी गई, घर से बाहर निकलने पर रोक लगा दी गयी |
डर का माहौल ऐसा की कोई कदम उठाने और बोलने से पहले एक बार फिर सोचने और विचारने की जरूरत महसूस होने लगी |
दूसरी तरफ पूरी दुनिया की नजर चीन पर है अमेरिका जैसे कई देश चाहते हैं कि चीन पर प्रतिबंध लगाया जाए, कई कंपनियां चीन छोड़कर बाकी देशों में अपना व्यापार करने पर विचार कर रही है, इन सब परिस्थितियों के बीच आज यह कहना कि चीन दुनिया में तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था है यह कोई नई बात नहीं है, चीन ने इसकी तैयारी 80 के दशक से शुरू कर दी थी |
अमेरिका जैसे देशों का मानना है कि चीन ने जानबूझकर यह वायरस बनाया ताकि जैविक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर पूरी दुनिया में अपने प्रतिनिधित्व करने की संभावना को और मजबूत कर सके |
कोरोनावायरस की खोज 1930 में हुई थी, लेकिन कोरोना-19 जो अब महामारी बन चुका है यह अनुवांशिक रूप से ज्यादा खतरनाक है बजाएं दूसरे कोरोना वायरस की तुलना में | दुनिया में लाखों लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं अभी तक कई ऐसे देश हैं जो इस महामारी पर काबू पाने में नाकाम साबित हो रहे हैं, जिसका कुछ हद तक कारण अशिक्षा और मेडिकल सुविधाओं का अभाव माना जा सकता है |
कोरोना का फैलना, कोरोना संक्रमण के आंकड़े, ठीक होते संक्रमित व्यक्तियों से हम कही बातों का विश्लेषण कर सकते हैं |
जिस वातावरण में हम रहते हैं वहां हजारों-लाखों ऐसे बैक्टीरिया और वायरस है जिनसे हमारा संपर्क होता है और लगभग सभी से हमारा शरीर लड़ने की पूरी कोशिश करता है और सफलता पाता हैं, लेकिन यह कहना कि शत-प्रतिशत व्यक्ति इससे लड़ने में सफल होते हैं यह गलत होगा, क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति का शरीर अपनी कुछ खूबियों और कमियों के साथ इस वातावरण में जीवित रहने के लिए संघर्ष करता है, इन खूबियों और कमियों का कारण हम अनुवांशिकता, खान-पान ,आचरण और विचरण को मान सकते हैं और इसी को हम विज्ञान में इम्यूनिटी या रोग प्रतिरोधक क्षमता कहते हैं |
अफ्रीका के कई देशों में जहां पर HIV वायरस ने खूब लोगों की जान ली आज वहां कोरोना के आंकड़े बहुत कम है जिसका एक कारण वहां के लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकसित होना है और कुछ हद तक वहां का वातावरण है, जो कोरोना वायरस की वृद्धि के लिए उपयुक्त नहीं है |
कोरोना वायरस से संक्रमित होने वालों में से 80 से 90% संपन्न समिति ठीक हो रहे हैं कोरोना की वजह से मृत्यु दर 10% से भी कम है | अब तक 200000 से ज्यादा लोगों की कोरोना वायरस से मौत हो चुकी है, वहीं दूसरी तरफ टीबी, मलेरिया, ऐड्स, रोड एक्सीडेंट, कैंसर जैसी घातक बीमारियों से हर साल लाखों-करोड़ों लोगों की
जाने जाती है लेकिन इन पर हमारा ध्यान इतना नहीं होता जितना आज कोरोना वायरस पर हैं |
आज हम जिस कोरोनावायरस से जूझ रहे हैं कहीं वह चीन जैसे देशों की गुमराह करने की साजिश तो नहीं ?
इसे आप ऐसे समझिये
हजारों-लाखों वायरस जो वातावरण में है उनमें से कहीं ऐसे हैं जो एक इंसान से दूसरे इंसान में बहुत जल्दी से जल्दी से फैलते हैं चीन ने उनमें से एक कोरोना वायरस को लेकर पूरी दुनिया में माहौल बना दिया और पूरी दुनिया को डर के माहौल में धकेल दिया | संभावनाएं कहने को कही है |
हमारे आस पास के वातावरण में ऐसे हजारों-लाखों वायरस है जिनका हमारे शरीर को लेकर टेस्ट किया जाए तो हममें से कई पॉजिटिव पाए जा सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह तो नहीं हो सकता कि वह हमें नुकसान पहुंचाएगा | पॉजिटिव आने पर भी हमारी बॉडी को नुकसान नहीं पहुंचा पाएंगे जिसका कारण हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता है |
इसको आप एक उदाहरण द्वारा समझ सकते हैं, जिस भीलवाड़ा मॉडल की दुनिया भर में तारीफ हो रही है उसी भीलवाड़ा में कुछ दिनों पहले चार व्यक्तियों को कोरोना संक्रमित पाया गया लेकिन इन्हीं चार कोरोना संक्रमित व्यक्तियों का जब दो दिन बाद फिर से टेस्ट किया गया तो इनकी रिपोर्ट नेगेटिव आयी जबकि इन चारों संक्रमित व्यक्तियों को कोई भी दवाई नहीं दी गई थी, इससे साफ हो जाता है कि कोरोना के इस खेल में रोग प्रतिरोधक क्षमता का बहुत बड़ा योगदान है |
मरने वालों में अधिकतर संक्रमित व्यक्ति वो है जिनकी उम्र 60 से अधिक है जिससे हम यह समझ सकते हैं कि संक्रमण आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता पर निर्भर करता है |
हाल ही में आई सूचनाओं के आधार पर कई स्थितियां ऐसी भी बनी है जिसमें एक कोरोना वायरस के संपर्क में आया व्यक्ति कई सैकड़ों दूसरे लोगों के सम्पर्क में आया इसके बावजूद संपर्क में आने वाले व्यक्तियों की कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आयी, यह परिस्थिति भी कहीं ना कहीं रोग प्रतिरोधक क्षमता की तरफ इशारा करती है |
कोरोना वायरस ज्यादातर Respiratory System को संक्रमित करता है जिससे श्वास लेने में तब तकलीफ होने लगती है और अंततः व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है
इस तरह से होने वाली मौतों पर अगर अच्छे से विश्लेषण किया जाए तो हम पाएंगे कि व्यक्ति जो पहले से Respiratory System से संबंधी समस्याओं से परेशान है अगर ऐसे लोगों को कोरोना वायरस का संक्रमण हो जाय तो निश्चित ही इसके घातक परिणाम आएंगे या स्थिति पहले से बदतर हो सकती है लेकिन जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत है और Respiratory System से संबंधित कोई समस्या नहीं है उनके कोरोना
संक्रमित होने पर भी मृत्यु होने की संभावना बहुत कम है |
कोरोना के इस भयावह माहौल में हम अगर अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने की कोशिश करें तो हम इस कोरोना संक्रमण काल से आसानी से निकल सकते हैं
इसके लिए हम अच्छा खाएं, अच्छा पिए और डर के माहौल को अपने अंदर से हटाकर सकारात्मकता को जगह दें |

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