भारत को प्रोत्साहन आधारित "वन चाइल्ड पॉलिसी" लागू करनी होगी - डॉ. अंकित नाहटा
हमारे देश भारत की तेजी से बढ़ती जनसंख्या पिछले कई दशकों से सरकार और समाज दोनों के लिए चिंता का प्रमुख विषय बनी हुई है। हाल ही में विश्व जनसंख्या के नवीनतम आकलनों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अब दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है।
यह उपलब्धि जितनी सांख्यिकीय रूप से बड़ी प्रतीत होती है, व्यवहारिक दृष्टि से उतनी ही गंभीर चुनौतियों को जन्म देती है। संसाधनों पर बढ़ता दबाव, स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में बढ़ती भीड़, रोजगार सृजन की कमी और शहरों का अनियंत्रित विस्तार ये सभी चुनौतियाँ हमें एक ऐसे समाधान की ओर सोचने के लिए मजबूर करती हैं, जो भारत की वास्तविकताओं के अनुरूप हो, क्योंकि अगर हम जनसंख्या नियंत्रण पर ध्यान नहीं देंगे तो आने वाला समय भारत के लिए बहुत ही विकट और भयावह हो सकता है ।
“प्रोत्साहन आधारित वन चाइल्ड पॉलिसी” अब एक शानदार तर्कसंगत और आवश्यक विकल्प बनकर उभर रही है। मेरा ऐसा मानना है कि भारत चीन जैसी जबरन थोपे जाने वाली वन चाइल्ड पॉलिसी भले ही लागू ना करें, लेकिन स्वैच्छिक और आकर्षक प्रोत्साहनों पर आधारित नीति की जरूरत है, जो नागरिकों को किसी भी तरह से प्रेरित करे की वो जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए कम बच्चों को जन्म देने की कोशिश करें । हमारे देश भारत की जनसंख्या जहां कई मायनों में अवसर को दिखाती है, वही उतनी ही बड़ी चुनौती भी होती जा रही है । हमारा देश भारत दुनिया की सबसे युवा आबादी वाला देश है, यह हमारे लिए एक बड़ा अवसर है, लेकिन तभी है, जब हम इस आबादी को बेहतर शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य सुविधाएँ दे सकें। अगर ऐसा न हो सके तो वही युवा भविष्य में बोझ भी बन सकते है । पिछले कई सालों में देश के कई राज्यों में जनसंख्या स्थिरता की दिशा में सकारात्मक संकेत दिखाई दे रहे हैं। दक्षिण और पश्चिम भारत के कई राज्यों में कुल प्रजनन दर (TFR) 2.1 से नीचे जा चुकी है। वहीं, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्य अभी भी उच्च प्रजनन दर से जूझ रहे हैं।
इन परिस्थितियों को देखते हुए जनसंख्या नियंत्रण कोई विकल्प नहीं—एक अनिवार्यता बन चुका है, और हमें किसी भी हालत में जनसंख्या नियंत्रण करने के लिए तरीकों को खोजना होगा और हर हाल में जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए हर संभव कोशिश करनी होगी। दुनिया में जब भी वन चाइल्ड पॉलिसी की बात होती है, चीन का उदाहरण सामने आता है।
चाइना की वन चाइल्ड पॉलिसी
1979 में लागू इस पॉलिसी ने चीन की जनसंख्या वृद्धि को रोक दिया,—क्योंकि चीन यह बहुत अच्छे से जानता था कि बिना जनसंख्या की वृद्धि को रोके वो दुनिया में कभी भी शीर्ष पर नहीं हो सकता है, क्योंकि जितनी ज्यादा जनसंख्या वृद्धि दर होगी उतना ही ज्यादा संसाधनों पर दबाव बढ़ेगा, उतनी ही ज्यादा वहां के नागरिकों में प्रतिस्पर्धा होगी, हालांकि चीन ने वन चाइल्ड पॉलिसी जिस तरह से लागू किया उसने कई मानवीय पहलुओं को बिगाड़ दिया और उसके कई दुष्परिणाम भी हुए, जैसे लड़कों और लड़कियों का अनुपात भयानक रूप से बिगड़ गया, सामाजिक और भावनात्मक समस्याएँ बढ़ीं, चीन की युवा कार्यबल तेजी से घटने लगी, और देश आज वृद्ध आबादी के संकट से जूझ रहा है।
हमें जनसंख्या वृद्धि दर को रोकने के लिए प्रयास तो करने होंगे लेकिन चीन की जो नीति उसने अपनाई है उसको मध्य नजर रखकर हम इतना कर सकते हैं कि हम हमारी वन चाइल्ड पॉलिसी को किसी दूसरे रूप में पेश करें, किसी दूसरे रूप में लागू करें, भारत को एक ऐसी नीति की आवश्यकता है, जो स्वैच्छिक, नैतिक और समाज के अनुकूल हो । आज हमारे देश में आखिर क्यों जरूरी है वन चाइल्ड पॉलिसी ? 1. संसाधनों पर बढ़ता दबाव 2. शिक्षा और स्वास्थ्य की गुणवत्ता 3. महिलाओं का सशक्तिकरण 4. आर्थिक स्थिरता और युवा रोजगार जैसे कई मुद्दे है जो बिना जनसंख्या नियंत्रण के बेहतर नहीं हो सकते है ।
सरकार लाभ दे, न की दंड
हमारे देश भारत के लिए आदर्श नीति ऐसी होनी चाहिए जिसमें सरकार लाभ दे, न कि दंड, जैसे एक बच्चे वाले परिवारों को विशेष आर्थिक लाभ, आयकर में 10–20% तक की छूट, सरकारी नौकरियों में अतिरिक्त अंक, सरकारी आवास योजनाओं में प्राथमिकता, बैंक लोन (मकान/शिक्षा) पर ब्याज में रियायत, बच्चे की शिक्षा के लिए विशेष वार्षिक सहायता । यह अभियान समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। प्रोत्साहन आधारित मॉडल इस मामले में सुरक्षित है क्योंकि इसमें कोई सख्ती या दबाव नहीं होगा।
हमारा देश भारत एक विशाल लोकतांत्रिक देश है। यहाँ जनता को भय दिखाकर कोई नीति सफल नहीं हो सकती। इसलिए प्रोत्साहन आधारित वन चाइल्ड पॉलिसी सबसे व्यावहारिक विकल्प बनकर उभरती है तो यह मॉडल न तो चीन की तरह कठोर होगा और न ही पूरी तरह खुला। यह एक “मध्य मार्ग” है जो भारत के सामाजिक ताने-बाने के अनुकूल होगा, और जल्द हमारा देश आर्थिक, सामाजिक और तकनीकी जैसी चीजों में शीर्ष पर होगा ।
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