एक होता बहुसंख्यक | Uniting Majority |
इस दुनिया में एक दूसरे के प्रति विश्वास और सम्मान का पर्याय है नरेंद्र मोदी और अमित शाह, जीवन में विश्वास प्यार से बड़ा होता है या यह कहे कि दुनिया में विश्वास से बड़ा कोई नहीं होता है और यह अमूल्यवान है और यह हम नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी में देख सकते हैं |
कभी अमेरिका का वीजा देने से मना करना हो या 2002 के गोधरा कांड के धब्बे हो, अपनी चतुराई और राजनीतिक समझ से आज सब बेदाग नजर आते हैं ।
70 साल तक राज करने वाली कांग्रेस ने शायद ही कभी सोचा होगा कि हमें इतने बुरे दिन राजनीति मे देखने को मिलेंगे । कभी राजनीति की पर्याय कह जाने वाली कांग्रेस आज अपनी वर्चस्व के लिए मौका ढूंढ रही है और आज इस बात से मना नहीं किया जा सकता कि राजनीति बीजेपी के इर्द-गिर्द घूम रही है।
आज सोचने वाला सवाल यह है कि यह सब हुआ कैसे ? 1990 के दशक में जिस पार्टी के लिए "हम दो हमारे दो कहने" वाली कांग्रेस, आम जनता का विश्वास खोती जा रही है | 70 साल तक कांग्रेस ने जो राजनीति की, वही राजनीति बीजेपी कर रही है लेकिन फर्क इतना सा है कांग्रेस ने अल्पसंख़्यक को सुरक्षित रखना उचित समझा और बहुसंख्यक आबादी को जोड़-तोड़ की राजनीति के लिए समझा, कांग्रेस को बहुसंख्यक के एक होने की कोई संभावना नजर नहीं आती थी इसीलिए उसने अल्पसंख्यक को सुरक्षित समझा और बहुसंख्यक को जैसा चाहा वैसी उनके साथ राजनीती कि |
आज देश में माहौल कुछ और है नरेंद्र मोदी अमित शाह ने कांग्रेस की ही रणनीति अपनाई है लेकिन कुछ बदलाव के साथ, आज देश में बहुसंख्यक आबादी को देश में एक होता देखा जा सकता है और उसका श्रेय नरेंद्र मोदी और अमित शाह की मानसिकता को दिया जाए तो शायद इसमें कोई आश्चर्य जनक बात नहीं होगी |
आखिर यह शुरुआत हुई कैसे ? कैसे एक इंसान ने गुजरात के छोटे से पद से राजनीति शुरू की और आज वो देश ही नहीं दुनिया की नजर में हैं |
मुझे लगता है इसका श्रेय भाजपा की विचारधारा और नरेंद्र मोदी और अमित शाह की राजनीति को दिया जाना चाहिए | कांग्रेस जिसे राजनीति विरासत में मिली थी 70 साल सत्ता में रहते हुए भी यह नहीं समझ पाई की राजनीति में उसका भविष्य क्या है ? और आगे क्या होने वाला हैं ?
आज देश में आर्थिक हालात बहुत खराब है लेकिन आम जनता को यह बताया जा रहा है कि आप का इतिहास क्या है ? आपके साथ पिछले 70 सालों में क्या किया गया किस तरह की आपके साथ राजनीति की और आने वाले समय में कांग्रेस की राजनीति रही तो आपका क्या हाल हो सकता है !
देश की बहुसंख्यक आबादी को यह बताया जा रहा है कि कैसे कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने आपके साथ और इस देश के साथ तुष्टीकरण की राजनीति की और आज जनता भी काफी हद तक देश में 8 - 10 महीने में हुए फैसले से शायद यही समझ पाई |
पहले तीन तलाक, फिर धारा 370, राम मंदिर अब CAB - NRC से साफ हो जाता है कि प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से यह फैसले अल्पसंख्यकों को नाखुश करने वाले हैं | पिछले 100 साल से लंबित राम मंदिर, 70 साल से लंबित और विवादास्पद धारा 370, यह वह सब है जिन्होंने बहुसंख्यक आबादी को नरेंद्र मोदी और बीजेपी की तरफ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से झुकने के लिए मजबूर कर दिया है |
आज देश में कई तरह के विरोध हो रहे हैं और सरकार भी कहीं ना कहीं अपने आप को सर्वोच्च समझ रही है कि जो शायद उनका भी आने वाले समय में कांग्रेस जैसा हाल कर सकता है | आज विपक्ष को देखें तो लगता है कि शायद उनके नेताओं की विचारधारा में राजनीतिक स्वरूप अदृश्य नजर आता है |
तीन तलाक, धारा 370, राम मंदिर और अब CAB - NRC पर देश में आज विपक्ष अपने पांव पर कुल्हाड़ी मारने की कोशिश कर रहा है और यह समझने की कोशिश नहीं कर रह है कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह किस मानसिकता के साथ राजनीति कर रहे हैं और वर्तमान में उन्हें( विपक्ष ) को किन मुद्दों पर राजनीति करनी चाहिए | आज की स्थिति देखकर यह कहना कि विपक्ष मजबूत है शायद मात्र सांत्वना देना जैसा होगा |
कुछ लोग सोशल मीडिया पर हिंदुत्व की राजनीति और हिंदुत्व को कोेस रहे हैं और इन सब चीजों का फायदा उठाकर नरेंद्र मोदी और अमित शाह बहुसंख्यको एक करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं और लगभग वह यह करने में सफल भी हुए | आज देश में हिंदू मुसलमान के बीच दीवार खींचने की कोशिश की जा रही है जिसमें ना कांग्रेस कम है और ना वर्तमान सरकार बीजेपी,आज मुकाबला बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक लोगों के बीच नजर आ रहा है और नरेंद्र मोदी और अमित शाह की चतुराई इसे बहुसंख्यक हिंदू और अल्पसंख्यक मुस्लिम के बीच कर दिया है |
आज देश में इन हालातों के लिए जितनी बीजेपी और जिम्मेदार है उतनी ही कांग्रेस पार्टी और उनके सहयोगी भी जिम्मेदार हैं | आज देश में जिन मुद्दों को लेकर राजनीति होनी चाहिए उन पर कोई भी पार्टी काम ही नहीं करना चाहती है | मुझे लगता है धारा 370, राम मंदिर, और CAB -NRC यह सब देश के प्राथमिक मुद्दे नहीं है आज देश में अच्छी शिक्षा और चिकित्सा, सबको समान अवसर कैसे मिले इसकी जरूरत है इस पर राजनीति करने की जरूरत हैं, लेकिन हमारे देश की राजनीति आजादी के बाद कभी भी इन मुद्दों के इर्द-गिर्द नहीं रही हैं |
कभी विनायक दामोदर दास सावरकर, तो कभी नाथूराम गोडसे, कभी महात्मा गांधी तो कभी गांधी परिवार हमारी राजनीति के केंद्र बिंदु है | आज नरेंद्र मोदी और अमित शाह की विचारधारा ने बहुसंख्यक आबादी को एक होने के लिए मजबूर कर दिया है उनके हर फैसले में हिंदू-मुस्लिम भारत - पाकिस्तान की झलक दिखती है और कुछ रही कमी विपक्ष और उसके साथी कर देते हैं जिससे उनका काम और भी आसान हो जाता है | पिछले कुछ दिनों में CAB -NRC के लिए सैकड़ों लाखों लोग सड़क पर उतर रहे हैं कोई समर्थन में तो कोई विरोध में लेकिन सोचने का विषय यह है कि आखिर होगा क्या ?
यह देश लोकतांत्रिक देश हैं यहाँ सरकार को 5 साल के लिए चुना जाता है, सर्वोच्च कहे जाने वाले राष्ट्रपति भी सिर्फ नाम मात्र के संवैधानिक है वह भी शायद वही करेंगे जो सतादल कहेगा । सड़कों पर आना तोड़फोड़ करना यह सब राजनीतिक फायदे के लिए कराया जाने वाला और अपनी अपनी राजनीतिक दुकानें चलाने का एक जरिया है लेकिन इसका फायदा भी सत्ता दल अपनी राजनीतिक सूझबूझ और चतुराई से बहुसंख्यक आबादी को अपनी तरफ करने में कर रहा है |आज देश के लोगों खासकर विपक्षी लोगों को हिंदू मुस्लिम और भारत पाकिस्तान जैसे मुद्दों पर अपना राजनीतिक कदम उठाने से पहले सोचना चाहिए क्योंकि आपकी 70 साल की विचारधारा को नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने पलट दिया है और अल्पसंख्यक की जगह आज बहुसंख्यक आबादी एकजुट होती नजर आ रही है जिससे आप नरेंद्र मोदी और अमित शाह की मानसिकता और इसे आप विपक्ष में रहकर नकार नहीं सकते हैं क्योंकि इसकी शुरुआत स्वयं कांग्रेस ने की थी | अगले कुछ सालों में राजनीतिक किस तरफ करवट लेगी यह कहना मुश्किल होगा लेकिन वर्तमान स्थिति रही और हिंदू-मुस्लिम भारत-पाकिस्तान यह हमारी राजनीती के विषय रहे तो मोदी और भाजपा को हटाना मुश्किल सा लगता है | इसीलिए विपक्ष और विपक्ष के साथियों को अपनी राजनीति सोच समझकर करनी होगी और अल्पसंख्यकों के साथ-साथ बहुसंख्यक को भी अपनी और कैसे किया जाए इस पर भी सोच विचार करना होगा |
जय हिंद जय भारत |
जय जवान जय किसान |

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