क्या हनुमान बेनीवाल होंगे राजस्थान के केजरीवाल ?


इस बार राजस्थान की राजनीति में हम चमत्कार की उम्मीद कर सकते हैं | एक तरफ भाजपा लगी है दूसरी तरफ कांग्रेस और तीसरी तरफ एक ऐसा व्यक्ति खड़ा है जिसने पिछले कुछ सालों में अपनी ऐसी छवि बनाई है  की जनता उसकी एक आवाज सुनने के लिए मीलों चलकर आती हैं| राजस्थान की राजनीति में इस बार शायद लग रहा है की कुछ तो ऐसी घटना होगी जो इतिहास में लिखी जाएगी | मैं  बात कर रहा हूं खींवसर से निर्दलीय विधायक हनुमान बेनीवाल कि जिनकी जनता ऐसी दीवानी है और खासकर युवा जो राजस्थान की राजनीति में  परिवर्तन लाने के लिए उनके साथ खड़ा है | उनकी इस लोकप्रियता के पीछे एक तर्क हैं आप उन्हें अगर रात को 2 बजे भी फ़ोन पर अपनी मुसीबत बताएँगे तो वो आपकी मुसीबत के लिए 2 बजे आपके पास पहुंच जाएंगे |मतलब वो आपके नेता के लिए हजारों लाखों नेताओं से आगे खड़े हैं |
                     हनुमान बेनीवाल की बढ़ती लोकप्रियता, जनता का उनके प्रति विश्वास यह दर्शाता है वो आने वाले विधानसभा चुनावों में राजस्थान के केजरीवाल साबित हो सकते हैं | उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है जितनी संख्या में लोग उन्हें सुनने के लिए आते हैं शायद इतने लोग हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली में भी नहीं आते हैं और खास बात जो लोग उन्हें सुनने के लिए आते हैं वो सारे के सारे अपने अपने वाहनों से पहुंचते हैं |
                    हनुमान बेनीवाल चाहते हैं कि राजस्थान में किसानों का राज आए, प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार हों, देश के युवाओं को आगे लाया जाए और वो इसी दम पर राजस्थान का आगामी विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं | प्रदेश की जनता को एक विकल्प  मिला है उनकी राजनीतिक सोच से | राजस्थान के जो हालात हैं उन्हें देखकर यह लगता है  एक ऐसे व्यक्ति की हमारे प्रदेश  को जरूरत है जो प्रदेश को एक नई दिशा दे सकें | जो सरकार किसानों, प्रदेश के युवाओं, प्रदेश की महिलाओं कि स्थिति को सुधार सकें |
                 हनुमान बेनीवाल कि जो सबसे बड़ी मुसीबत हैं वो जातिगत राजनीति हैं | राजपूत, ब्राह्मण, मुस्लिम,और अन्य समाज उन्हें वोट देना पसंद करेंगे या नही यह सोचने और विचारने का प्रश्न हैं क्यूंकि उनकी पहचान आज भी एक जाट नेता के रूप हैं जो कही ना कही उनके लिए खतरे की घंटी हो सकती हैं |किरोड़ी लाल मीणा का साथ छोड़ना और घनश्याम तिवारी के साथ आने की बात कहा तक सही होगी और क्या परिणाम होंगे यह 2018 के विधानसभा चुनाव बताएगे | लेकिन हनुमान बेनीवाल इस विधानसभा चुनाव में राष्ट्र नेता कि पहचान जरुर पा लेंगे, जो बीजेपी और कांग्रेस दोंनो के लिए खतरे की घंटी शाबित हो सकते हैं |

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