JNU क्या चाहता हैं ? शिक्षा या राजनीती या अपना अधिकार ....
JNU जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी पिछले कुछ सालों से इसलिए चर्चा में है क्योंकि यहां के विद्यार्थी हर उस चीज की निंदा कर रहे हैं जो देश विरोधी जो देश को बर्बाद कर रही है | वहीं दूसरी तरफ नेताओं का कहना हैं की JNU के विद्यार्थियों को सिर्फ पढ़ना लिखना चाहिए, राजनीति से उनका दूर रहना ही बेहतर होगा | JNU के विद्यार्थियों की एकता देखकर लगता है कि ऐसी ही एकता अगर हमारे देश में हो जाए हमारे साथ-साथ इन नेताओं को भी सड़क पर आने के लिए मजबूर किया जा सकता हैं | अपने हक के लिए लड़ना मुझे लगता है यह शिक्षा ही सिखाती है शिक्षा को पाकर आप अगर अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं तो यह जरूरी हैं इस पर सवाल खड़ा करने का किसी को अधिकार नहीं हैं | JNU इस देश को धर्म के नाम पर नहीं बांटना चाहता हैं वो अपनी पहचान एक भारतीय के रूप में चाहते हैं, महिलाओं को सम्मान देना चाहते हैं गरीबों को सड़क से उठाकर घरों तक और संसद तक पहुंचाना चाहते हैं, सबको समान शिक्षा दिलवाना चाहते हैं चाहे गरीब हो या अमीर एक साथ बैठकर शिक्षा प्राप्त करें और फिर अपनी मेहनत से वो अपने आप को जहां पहुंचाना चाहे वहां पहुचाएं |
देश विरोधी नारों के नाम पर शुरू हुई नेताओं की झूठी राजनीति आज देश की आवाज बन गयी हैं | और नेताओं से ऐसे सवाल पूछ रही हो जिनका जवाब देते-देते नेताओं को पता नहीं चल रहा है कि अब क्या किया जाए | इसलिए कभी JNU के विद्यार्थियों को देश विरोधी बताकर तो कभी JNU का बजट काटकर या अभी का फैसला जिसमें सरकार शिक्षा का बाजारीकरण करना चाहती है | मुझे लगता है JNU को हराना असंभव है क्योंकि यहां पर आने वाला विद्यार्थी देश के उन तमाम गांव का प्रतिनिधित्व करता है जो इन नेताओं को वास्तविक भारत का आईना दिखाते हैं जो इनकी स्वार्थी राजनीति कि वास्तविकता से इन्हें अवगत कराते और अपने ज्ञान से अज्ञानी नेताओं की बोलती बंद करते हैं |
मुझे JNU की एकता बहुत प्रभावित करती है, और उनकी मांग जायज लगती हैं, लेकिन कभी कभी JNU के विद्यार्थियों का एक तरफा रिश्ता सोचने के लिए मजबूर कर देता है | JNU के विद्यार्थी हमेशा BJP, नरेंद्र मोदी और RSS को अपना निशाना बनाते हैं जिसे मैं गलत नहीं कहना चाहता | लेकिन अपने पास बैठे अरविंद केजरीवाल और कांग्रेस के खिलाफ क्यों नहीं बोलना चाहते अगर आप BJP और नरेंद्र मोदी को देश की सत्ता से हटाना चाहते हैं यह ठीक हैं ,लेकिन उसकी जगह कांग्रेस को या राहुल गांधी को लाना कहां तक ठीक है ,क्योंकि यह वही कांग्रेस है जिसने 70 सालों में सिर्फ अपना विकास किया है, देश की जनता हमेशा से शोषण किया | आज JNU को अपने दम पर खड़ा होने की जरूरत है ना कि कांग्रेस और केजरीवाल की राजनीति का सहयोग लेने की ताकि इस देश को इन स्वार्थी नेताओं और उनकी स्वार्थी राजनीति से मुक्त कराया जा सके और मुझे लगता है कि इस काम की शुरुआत को JNU के विद्यार्थियों से बेहतर कोई नहीं कर सकता हैं |
देश विरोधी नारों के नाम पर शुरू हुई नेताओं की झूठी राजनीति आज देश की आवाज बन गयी हैं | और नेताओं से ऐसे सवाल पूछ रही हो जिनका जवाब देते-देते नेताओं को पता नहीं चल रहा है कि अब क्या किया जाए | इसलिए कभी JNU के विद्यार्थियों को देश विरोधी बताकर तो कभी JNU का बजट काटकर या अभी का फैसला जिसमें सरकार शिक्षा का बाजारीकरण करना चाहती है | मुझे लगता है JNU को हराना असंभव है क्योंकि यहां पर आने वाला विद्यार्थी देश के उन तमाम गांव का प्रतिनिधित्व करता है जो इन नेताओं को वास्तविक भारत का आईना दिखाते हैं जो इनकी स्वार्थी राजनीति कि वास्तविकता से इन्हें अवगत कराते और अपने ज्ञान से अज्ञानी नेताओं की बोलती बंद करते हैं |
मुझे JNU की एकता बहुत प्रभावित करती है, और उनकी मांग जायज लगती हैं, लेकिन कभी कभी JNU के विद्यार्थियों का एक तरफा रिश्ता सोचने के लिए मजबूर कर देता है | JNU के विद्यार्थी हमेशा BJP, नरेंद्र मोदी और RSS को अपना निशाना बनाते हैं जिसे मैं गलत नहीं कहना चाहता | लेकिन अपने पास बैठे अरविंद केजरीवाल और कांग्रेस के खिलाफ क्यों नहीं बोलना चाहते अगर आप BJP और नरेंद्र मोदी को देश की सत्ता से हटाना चाहते हैं यह ठीक हैं ,लेकिन उसकी जगह कांग्रेस को या राहुल गांधी को लाना कहां तक ठीक है ,क्योंकि यह वही कांग्रेस है जिसने 70 सालों में सिर्फ अपना विकास किया है, देश की जनता हमेशा से शोषण किया | आज JNU को अपने दम पर खड़ा होने की जरूरत है ना कि कांग्रेस और केजरीवाल की राजनीति का सहयोग लेने की ताकि इस देश को इन स्वार्थी नेताओं और उनकी स्वार्थी राजनीति से मुक्त कराया जा सके और मुझे लगता है कि इस काम की शुरुआत को JNU के विद्यार्थियों से बेहतर कोई नहीं कर सकता हैं |

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