राष्ट्रपति - रामनाथ कोविंद या मीरा कुमार

हाल ही में हमारे देश में राष्ट्रपति उम्मीदवारों की घोषणा की गयी | एक तरफ रामनाथ कोविंद तो दूसरी तरफ मीरा कुमार है | रामनाथ कोविंद को बीजेपी ने अपना उम्मीदवार बनाया है वही  मीरा कुमार को  विपक्षी दलों ने अपना उम्मीदवार बनाया है | बीजेपी ने रामनाथ कोविंद को एक दलित चेहरे के रूप में अपना उम्मीदवार बनाया है जवाब में विपक्षी दलों ने दलित चेहरे के रूप में मीरा कुमार को अपना उम्मीदवार बनाया | इस सोच को देखकर इस बार लगता है हमारे देश हैं राष्ट्रपति चुनाव राष्ट्रपति चुनाव ना होकर दलित वर्ग के लोगों का चुनाव होगा  | यह बात ठीक है की किसी दलित व्यक्ति को आगे बढ़ाना चाहिए लेकिन जिन लोगों को बीजेपी और विपक्षी दलो ने अपना नेता बनाया है वह सिर्फ नाम मात्र के दलित है | रामनाथ कोविंद 1994 से सांसद है वही मीरा कुमार 1985 से राजनीति में है और 5 बार सांसद रह चुकी है |
क्या यह जरुरी है की कोई दलित परिवार में पैदा होने के बाद अपनी आर्थिक स्थिति नही सुधार सकता ?
2014 के लोकसभा चुनाव के अनुसार मीरा कुमार के पास 38 करोड़ की  सम्पति है वही रामनाथ कोविंद के पास 1.41 करोड़ की सम्पति है |
लेकिन फिर भी  देश की जनता को पागल बनाने के लिए इनके नाम के आगे दलित शब्द का उपयोग किया जा रहा है | ताकि देश की जनता को यह लग सके की हमारे देश  की पार्टियां गरीब लोगों को आगे लाने का प्रयास  कर रही है |
 रामनाथ कोविंद और मीरा कुमार को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाना गलत नहीं है लेकिन यह कहकर उम्मीदवार बनाना की यह दलित है यह गलत है |
 अगर हम  रामनाथ कोविंद और मीरा कुमार के बारे में दलित राजनीती से हटकर बात की जाये जो दोनों ही उम्मीदवार राष्ट्रपति चुनाव के लिए या देश की राजनीती के लिए सही नही | क्युकी दोनों ही ऐसे उम्मीदवार है जिनको  देश की जनता ने अस्वीकार किया है |  रामनाथ कोविंद जो कभी  भी चुनाव नहीं जीत पाए वही मीरा कुमार को 2014  के चुनाव में हार का सामना करना पड़ा |हमारा देश लोकतांत्रिक देश है लेकिन इन  उम्मीदवारों को देखकर ऐसा लगता है हमारी लोकतंत्रता को खतरा है |आखिर क्यों हमारे देश में उन लोगो को लोकतान्त्रिक पद पर बिठाया जा रहा है जिन्हें हमारे देश की जनता ने अपने वोट के अधिकार से नामंजूर कर दिया है | यही चीज़ आज हमारे देश के राष्ट्रपति चुनाव में हो रही है दोनों ही उम्मीदवारो को हमारे देश की जनता ने नामंजूर कर दिया है लेकिन राजनेतिक पार्टिया अपने स्वार्थ के लिए ऐसे लोगो को अपना उम्मीदवार बना देती है | यह हमारे लोकतान्त्रिक देश को शर्मिंदा करने वाली बात है | चाहें कोई भी राजनीती पार्टी क्यों न हो लेकिन उन्ही लोगो को लोकतान्त्रिक पद पर बैठाना चाहिए जिन्हें जनता अपने वोट से चुनकर हमारे देश को चलाने का अवसर देती है |
आज ऐसी कही चीज़े हमारे देश में हो रही है | इसलिए आज इन्हें अनदेखा करने के बजाय हमें इन्हें बदलने की जिम्मदारी उठानी होगी तभी हमारा देश बदल सकता है

"जिन्दगी जीने के दो ही तरीके है या तो जो हो रहा है उसे देखते रहो या फिर जिम्मेदारी उठाओ उसे बदलने की "


जय हिन्द | जय भारत |


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