भ्रष्टाचार की जड़ें “संसद से लेकर पंचायत” तक गहरी हैं ।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। हमारे संविधान ने प्रत्येक नागरिक को समानता, स्वतंत्रता और न्याय का अधिकार दिया है। लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत जनता है और जनता द्वारा चुनी गई सरकार उसकी आकांक्षाओं की प्रतिनिधि होती है। लेकिन जब लोकतांत्रिक व्यवस्था में भ्रष्टाचार अपनी जड़ें जमा लेता है, तो उसका प्रभाव केवल सरकारी खजाने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह समाज के विश्वास, विकास की गति और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को भी कमजोर करता है। आज भारत में भ्रष्टाचार को केवल किसी एक राजनीतिक दल, सरकार या अधिकारी की समस्या मानना उचित नहीं होगा। यह समस्या व्यवस्था के अलग-अलग स्तरों पर दिखाई देती है। संसद से लेकर विधानसभा, मंत्रालय से लेकर सरकारी कार्यालय और जिला स्तर से लेकर ग्राम पंचायत तक—जहाँ कहीं सार्वजनिक धन, अधिकार और निर्णय लेने की शक्ति है, वहाँ भ्रष्टाचार की संभावनाएँ भी मौजूद हैं। संसद से शुरू होने वाली बहस संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च राजनीतिक मंच है। देश के कानून यहीं बनते हैं, सरकार की नीतियों पर चर्चा होती है और जनता के प्रतिनिधि राष्ट्रीय मुद्दों पर निर्णय लेत...